| Jan 01, 1970 | Daily Report |
| RISING BHARAT | News Count (102948) | |
20781. JK To Create 4 Innovation Hubs Under New Education Policy: Kansal
- Principal Secretary Higher Education Department, Rohit Kansal on Friday reiterated that the J&K Government is committed to supporting the Indian Institute of Technology Jammu and other institutions to build a culture of innovation and growth.
- He also announced that the entire process would be enlarged and a J&K wide start up contest would be organized soon. The Higher Education department would support and facilitate a J&K wide version of the event which would be organized by the IIT and supported by the government.
- He confirmed that the government stands committed in supporting IIT Jammu in all their innovation efforts and are going to take this forward to expand the scope of this exercise to enable it to reach a much larger audience set. “We will expand our support in size as well as scope whereby IIT Jammu shall be developed as an incubation hub; we will also support other institutions and universities in J&K by mapping up these incubators with spokes that we will create in all our colleges. The resultant culture of innovation, growth and progress will benefit not just J&K but the entire nation.”
20782. Mizoram to get Northeast India’s first motor racing track near Aizawl
- Mizoram will get a motosports racing track and sports complex near Aizawl, which will be the first of its kind in all of eastern India, a minister said on Thursday.
- The proposed project worth Rs. 10 crore will be constructed at Lengpui, about 31 km north of Aizawl, where the state’s lone airport is located,
- The racing track will be the first of its kind in eastern India, according to the minister. Minister said that the MSSC will make massive efforts to ensure that the project is completed in time.
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20783. Police launches women safety squads in Srinagar to ensure women safety
- As the Srinagar city witnessed increase in woman related crimes, Jammu and Kashmir police launched a two-woman police squad to ensure the woman's safety in the city.
- According to officials, these teams would be patrolling areas around coaching centres, schools, colleges, and other sensitive areas in Srinagar. "These squads will also communicate directly with administrators of educational institutions and coaching centres in order to take rapid action in the event of an emergency."
- An official who is also the incharge of the women's police wing said that two-woman squads have been launched to provide safety to women in Srinagar. She said since this woman police patrolling started, there has been very little movement of boys around the coaching centres in the city. She said, adding that they would be roaming these places from 9 a.m. to 5 p.m.
20784. अनोखे अंदाज में खेती कर परंपरागत खेती के मुकाबले 4 गुना अधिक कमाता है यूपी का यह किसान
- यह कहानी उत्तर प्रदेश के शामली जिला के नग्गल गाँव में रहने वाले श्याम सिंह की है, जिन्होंने शिक्षक की नौकरी छोड़कर खेती को रोजगार का जरिया बनाया है। उन्होंने अपने 9 एकड़ की जमीन को फूड फॉरेस्ट में बदल दिया है और वहाँ अब प्राकृतिक तरीके से खेती कर रहे हैं।
- श्याम इन दिनों लीची, आम, अनार, नींबू, केला, पपीता, नाशपाती जैसे 45 फलदार पेड़ों के साथ पारंपरिक फसलों की खेती भी कर रहे हैं। इनके खेत में आपको धान-गेहूँ, दाल के अलावा हल्दी, अदरक की खेती भी देखने को मिलेगी।
- श्याम ने द बेटर इंडिया को बताया, “यह बात 1991 की है। मेरे पिता जी और चाची जी, दोनों की मौत कैंसर से हो गई थी। उस वक्त मुझे विचार आया कि आधुनिक कृषि तकनीकों की वजह से कई जहरीले रसायन हमारे खान-पान के जरिए शरीर को नुकसान पहुँचा रहे हैं। इसी जद्दोजहद में मैंने शिक्षक की नौकरी को छोड़ प्राकृतिक खेती शुरू कर दी।”
20785. लॉकडाउन में अपने खेतों पर जाना हुआ मुश्किल तो किसान ने शहर की खाली ज़मीनों को बना दिया खेत
- देश के किसी भी शहर में आप जाएंगे तो आपको ऐसी कोई न कोई जगह जरूर दिख जाएगी, जहाँ कूड़ा-कचरा का अंबार लगा रहता है। लेकिन क्या कभी आपने ऐसे शख्स के बारे में सुना है जो ऐसी जगहों को साफ कर वहाँ सब्जी उगा रहा हो, वह भी जैविक तरीके से? आज द बेटर इंडिया आपको एक ऐसे ही शख्स की कहानी सुनाने जा रहा है।
- केरल के कोची में रहने वाले 46 वर्षीय जैविक किसान एंथनी के. ए. शहर में सालों से खाली पड़ी या फिर कूड़ा-कचरा इकट्ठा करने के लिए इस्तेमाल की जा रही ज़मीनों पर तरह-तरह की सब्ज़ियां उगा रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने इस प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया और अब तक वह दो फसलें ले चुके हैं।
- 12वीं कक्षा तक पढ़े एंथनी पिछले 10 सालों से अलग-अलग जगह पर जैविक खेती कर रहे हैं और इसके साथ ही वह एक ऑर्गेनिक स्टोर भी चलाते हैं।
20786. भारतीय रेलवे: सौर ऊर्जा से बदल रहे हैं तस्वीर, 960 स्टेशन पर लगे सोलर पैनल
- जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भारतीय रेलवे विश्व के सबसे बड़े रेलवे नेटवर्क्स में से एक है। भारतीय रेलवे 68 हज़ार किलोमीटर से भी ज्यादा लम्बे ट्रैक्स के जरिए हर साल लगभग 8 बिलियन यात्रियों को सुविधा दे रहा है। आने वाले समय में यह आंकड़ा और भी बढ़ेगा।
- हर दिन लाखों की संख्या में यात्रियों को अपने गन्तव्य तक पहुँचाने वाले इस रेलवे नेटवर्क को चलने के लिए बहुत ज्यादा ऊर्जा की ज़रूरत होती है। भारतीय रेलवे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फ़िलहाल, रेलवे की वार्षिक ऊर्जा जरूरत 20 अरब यूनिट की है। इस ऊर्जा की आपूर्ति के लिए रेलवे अनवीकरणीय स्रोतों पर निर्भर है। हालांकि, पिछले कुछ सालों में लगभग 50% रेलवे को बिजली से जोड़ा गया है। आने वाले समय में बाकी रेलवे को भी बिजली से जोड़ा जाएगा।
- रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव कहते हैं, “आर्थिक विकास और खपत में हुई बढ़ोतरी के चलते साधनों की मांग भी बढ़ी है। लेकिन सस्टेनेबिलिटी के लिए ज़रूरी है कि हम आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण के मुद्दों पर भी ध्यान दें।”
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20787. Atmanirbhar Bharat: 'हनी मिशन' में हजारों लोगों को मिला रोजगार, सरकार ने जारी की परफॉर्मेंस रिपोर्ट
- हनी मिशन योजना खादी ग्रामोद्योग विभाग की योजना है. इसके जरिए किसान और पैसा कमाने की चाह रखने वाले लोग रोजगार शुरू कर मोटी कमाई कर सकते हैं. लोग हनी मिशन के तहत मधुमक्खी पालन कर कमाई कर सकते हैं. अब ऐसी तकनीक आ गई है, जिसके माध्यम से शहद निकालते समय मधुमक्खियां नहीं मरतीं. मोम और पॉलन भी बनता है. इससे न केवल किसान बल्कि बेरोजगार युवक भी बिजनेस के तौर पर देख रहे हैं.
- पीआईबी की ओर से किए गए ट्वीट के मुताबिक, साल 1956 से 2017 तक इस मिशन से लोगों की कमाई और रोजगार Nil था. वहीं साल 2017 से 2020 के बीच में 40000 रोजगार का सृजन किया गया है. इसके अलावा 8600 मीट्रिक टन शहद उत्पादन किया गया है. साथ ही 1.36 लाख मधुमक्खी के बक्से का वितरण किया गया है.
- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala sitharaman) ने आत्मनिर्भर भारत के तीसरे पैकेज में मधुमक्खी पालकों की कमाई बढ़ाने के लिए कई बड़े ऐलान किए थे. इसके अलावा वित्तमंत्री ने इस मिशन के तहत देश के हजारों लोगों को रोजगार देने की योजना बनाई थी. आपको बता दें हनी मिशन का परफॉर्मेंस रिपोर्ट जारी हो गए है और इस रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने अब तक लगभग 40 हजार लोगों को रोजगार दिया है. सरकार की ओर से इस योजना की शुरुआत साल 2017 में की गई थी.
20788. DIY वाटर फिल्टर बनाकर पीते हैं वर्षा जल, 6 साल में कभी नहीं खरीदा पानी
- बेंगलुरू में रहने वाले 66 वर्षीय संपत एस एक रिटायर्ड बैंकर हैं। छह साल पहले, जब वह जक्कुर में अपना घर बना रहे थे, तो उन्होंने 40 हजार लीटर के एक भूमिगत पानी की टंकी बनाने का फैसला किया। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह टंकी बारिश के पानी से भरा हुआ है। इस पानी को वह फिल्टर कर इस्तेमाल करते हैं।
- संपत ने द बेटर इंडिया को बताया, “इससे पहले, मैं आरटी नगर में रह रहा था, जहाँ कावेरी जल आपूर्ति की वजह से मेरी सभी जरूरतें पूरी हो जाती थी। लेकिन, जक्कुर में, ऐसी कोई सुविधा नहीं थी। ऐसी स्थिति में, बोरवेल की खुदाई करने या टैंकर से पानी खरीदने की जरूरत थी। लेकिन, हर दिन पानी खरीदना महंगा था और बोरिंग का पानी इस्तेमाल करने के लायक नहीं था, क्योंकि यहाँ भूमिगत जलस्तर 600 फीट से अधिक नीचे गिर गया है। इसलिए मैंने, घर में पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए बारिश के पानी को संरक्षित करने का फैसला किया। लेकिन, इसे एक चुनौती के रूप में लेते हुए मैंने इसे खुद से बनाने का फैसला किया।”
- शुरूआत में, उन्होंने पानी को फिल्टर करने के लिए व्यावसायिक रूप से उपलब्ध फिल्टरों को लगाया, जिसमें सेल्फ-क्लिनिंग गुण मौजूद थे। लेकिन, ये फिल्टर न सिर्फ महंगे थे, बल्कि इस प्रक्रिया में बहुत अधिक पानी बर्बाद होता था और संपत, इससे बिलकुल संतुष्ट नहीं थे। इसके बाद, उन्होंने सूती या नायलॉन के कपड़े से DIY फिल्टर तकनीक को अपनाया।
20789. गाँवों से पलायन रोकने के लिए नौकरी छोड़ शुरू की मशरूम की खेती, 5 करोड़ से अधिक है आय
- उत्तराखंड में पलायन एक बड़ी समस्या है। राज्य के ग्रामीण इलाके से हर साल बड़ी संख्या में लोगबाग शहर की ओर चले जाते हैं। ग्रामीण इलाके में रोजगार के अभाव की वजह से पलायन हो रहा है। आज हम आपको एक ऐसी महिला की कहानी सुनाने जा रहे हैं जिसने पलायन रोकने और स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार मुहैया कराने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी और देहरादून लौटकर खुद मशरूम की खेती शुरू कर दी।
- यह कहानी दिव्या रावत की है। वह अपने राज्य के लोगों के लिए कुछ करना चाहती थीं। यह बात तब की है, जब दिव्या नोएडा स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी से सोशल वर्क में मास्टर्स की पढ़ाई कर रही थीं। पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्हें एक प्रतिष्ठित गैर सरकारी संस्था में नौकरी भी मिली, जहाँ वह मानवाधिकार के मसले पर काम करती थीं। जब उन्होंने देखा कि उनके राज्य के लोग पलायन करने को मजबूर हैं और बड़े शहरों में आकर भी वह दयनीय जीवन जी रहे हैं, तभी उन्होंने इस दिशा में कुछ पहल करने का विचार आया और इसी दरम्यान साल 2013 में उत्तराखंड में भीषण बाढ़ आई थी।
- इस प्रलंयकारी बाढ़ से आहत, दिव्या ने तुरंत अपनी नौकरी छोड़ी और एक संकल्प के साथ देहरादून लौट आई। इसके बाद, उन्होंने राज्य के लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने की पहल शुरू कर दी और इसके लिए उन्होंने मशरूम की खेती और उसके प्रोसेसिंग को अपना लक्ष्य बनाया।
20790. 100 किसानों के उत्पाद लेकर 12 किस्म के चिप्स बनाए, विदेश तक पहुँचाया भारत का स्वाद
- कर्नाटक के श्रृंगेरी में रहने वाले भारद्वाज कारंत हमेशा से ही अपने इलाके के लिए कुछ करना चाहते थे। उन्होंने देखा था कि कैसे लोग अच्छे जीवन की तलाश में बड़े-बड़े शहरों में जाकर बस रहे हैं। खुद किसान परिवार से होने के चलते उन्होंने बहुत करीब से किसानों की परेशानी को समझा। दरअसल वह किसानों के लिए कुछ करना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने प्रोसेसिंग क्षेत्र को चुना।
- 28 वर्षीय भारद्वाज ने कंप्यूटर साइंस में एमएससी की है। इसके बाद पीएचडी करने लिए वह कोयम्बटूर गए थे। पीएचडी के लिए उनका टॉपिक डिजिटल प्रोसेसिंग था जिसमें आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस भी शामिल है। अपनी पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने एक कॉलेज भी ज्वाइन कर लिया और बतौर लेक्चरर काम करने लगे। साथ ही, वह यह भी सोचने लगे की कैसे वह अपने इलाके के लोगों के लिए काम कर सकते हैं।
- भारद्वाज ने द बेटर इंडिया को बताया, “अगर आप श्रृंगेरी की जनसंख्या को देखेंगे तो पता चलेगा कि 80 प्रतिशत लोग किसानी करते हैं। लेकिन किसानों के लिए अपनी फसल को बाज़ारों तक पहुँचाना बहुत मुश्किल है। उन्हें इसके लिए चिक्कामग्लुरु या फिर शिवमोगा जाना पड़ता है जो लगभग 100 किमी दूर है।”